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Monday, 25 January 2016

अध्याय 10 श्लोक 10 - 30 , BG 10 - 30 Bhagavad Gita As It Is Hindi

 अध्याय 10 श्लोक 30
दैत्यों में मैं भक्तराज प्रह्लाद हूँ, दमन करने वालों में काल हूँ, पशुओं में सिंह हूँ, तथा पक्षियों में गरुड़ हूँ |



अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 30




प्रह्लादश्र्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् |
मृगाणां च मृगेन्द्रोSहं वैनतेयश्र्च पक्षिणाम् || ३० ||



प्रह्लादः – प्रह्लाद; – भी; अस्मि – हूँ; दैत्यानाम् – असुरों में; कालः – काल; कलयताम् – दमन करने वालों में; अहम् – मैं हूँ; मृगाणाम् – पशुओं में; – तथा; मृग-इन्द्रः – सिंह; अहम् – मैं हूँ; वैनतेयः – गरुड़; – भी; पक्षिणाम् – पक्षियों में |




भावार्थ

दैत्यों में मैं भक्तराज प्रह्लाद हूँ, दमन करने वालों में काल हूँ, पशुओं में सिंह हूँ, तथा पक्षियों में गरुड़ हूँ |

तात्पर्य





दिति तथा अदिति दो बहनें थीं | अदिति के पुत्र आदित्य कहलाते हैं और दिति के दैत्य | सारे आदित्य भगवद्भक्त निकले और सारे दैत्य नास्तिक | यद्यपि प्रहलाद का जन्म दैत्य कुल में हुआ था, किन्तु वे बचपन से ही परम भक्त थे | अपनी भक्ति तथा दैवी गुण के कारण वे कृष्ण के प्रतिनिधि माने जाते हैं |
.
दमन के अनेक नियम हैं, किन्तु काल इस संसार की हर वस्तु को क्षीण कर देता है, अतः वह कृष्ण का प्रतिनिधित्व कर रहा है | पशुओं में सिंह सबसे शक्तिशाली तथा हिंसक होता है और पक्षियों के लाखों प्रकारों में भगवान् विष्णु का वाहन गरुड़ सबसे महान है |




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