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Monday, 25 January 2016

अध्याय 10 श्लोक 10 - 23 , BG 10 - 23 Bhagavad Gita As It Is Hindi

 अध्याय 10 श्लोक 23
मैं समस्त रुद्रों में शिव हूँ, यक्षों तथा राक्षसों में सम्पत्ति का देवता (कुबेर) हूँ, वसुओं में अग्नि हूँ और समस्त पर्वतों में मेरु हूँ |



अध्याय 10 : श्रीभगवान् का ऐश्वर्य

श्लोक 10 . 23




रुद्राणां शङ्करश्र्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् |
वसूनां पावकश्र्चास्मि मेरू: शिखरिणामहम् || २३ ||




रुद्राणाम् – समस्त रुद्रों में; शङकरः – शिवजी; – भी; अस्मि – हूँ; वित्त-ईशः – देवताओं का कोषाध्यक्ष; यक्ष-रक्षसाम् – यक्षों तथा राक्षसों में; वसूनाम् – वसुओं में; पावकः – अग्नि; – भी; अस्मि – हूँ; मेरुः – मेरु; शिखरिणाम् – समस्त पर्वतों में; अहम् – मैं हूँ |

भावार्थ

मैं समस्त रुद्रों में शिव हूँ, यक्षों तथा राक्षसों में सम्पत्ति का देवता (कुबेर) हूँ, वसुओं में अग्नि हूँ और समस्त पर्वतों में मेरु हूँ |

तात्पर्य





ग्यारह रुद्रों में शंकर या शिव प्रमुख हैं | वे भगवान् के अवतार हैं, जिन पर ब्रह्माण्ड के तमोगुण का भार है | यक्षों तथा राक्षसों के नायक कुबेर हैं जो देवताओं के कोषाध्यक्ष तथा भगवान् के प्रतिनिधि हैं | मेरु पर्वत अपनी समृद्ध सम्पदा के लिए विख्यात है |






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